My First Day in School Essay in Hindi

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विद्यालय में मेरा पहला दिन दिन पर निबंध - स्कूल में पहला दिन - विद्यालय का विवरण - विद्यालय में प्रथम दिन - सहपाठियों का विवरण


रुपरेखा : प्रस्तावना - विद्यालय का विवरण - विद्यालय में प्रथम दिन - सहपाठियों का विवरण - उपसंहार।

प्रस्तावना -

जब कोई व्यक्ति किसी अज्ञात जगह पर जाता है या किसी अपरिचित व्यक्ति से मिलता है, तब उसे बहुत-सी शंकाएँ रहती हैं। उसी प्रकार, जब हम किसी नए विद्यालय में जाते हैं, तो हमारा मन शंकाओं और प्रश्नों से भरा रहता है। हम बहुत घबराए रहते हैं। हम नए शिक्षकों और सहपाठियों के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं। नए विद्यालय में मेरा पहला दिन मुझे अभी तक याद है। मैं दसवीं वर्ग में था। मैं माध्यमिक विद्यालय से उच्च माध्यमिक विद्यालय में जा रहा था।

विद्यालय का विवरण -

विद्यालय में मेरा पहले दिन का अनुभव उस समय का है जब मेंने आठवीं कक्षा पास कर ली थी। मेरा रिजेल्ट बहुत ही अच्छा था मैंने प्रथम श्रेणी में पास कर लिया था। इसलिए मुझे शहर के एक अच्छे विद्यालय में प्रवेश लेने का अवसर प्राप्त हुआ। मेरे परिवार सहित सभी पास पड़ोस ओर रिश्तेदारों ने अपनी-अपनी सलाह ओर सुझाव प्रदान किये। सबके सुझाव सुनकर मेरे पापा ने मुझे एक अच्छे विद्यालय में मेरा प्रवेश करवा दिया। विद्यालय में प्रवेश के बाद मेरा प्रवेश पत्र भरकर जमा करवा दिया। कुछ दिनों बाद प्रवेश-सूची निकाली गई। और पहली सूची में ही मेरा नाम आ गया था। ये देखकर में बहुत खुश हुई। शुल्क, आदि जमा करने के बाद में अपने पठन-पाठन के लिए निश्चित समय पर विद्यालय के लिए घर से चल पड़ा।

विद्यालय में प्रथम दिन -

जब मैंने अपने नए विद्यालय के द्वार में प्रवेश किया, मैं चकित रह गया। इसका परिसर आकार में विशाल था। विद्यालय-भवन बहुत सुंदर था। मैंने अपनी कक्षा को ढूँढ़ा और अंदर गया। अधिकतर सीटें भरी हुई थीं। मैंने देखा कि आखिरी बेंच खाली था और वहाँ बैठ गया। मेरे सभी सहपाठी मुझे अनभिज्ञ ढंग से घूर रहे थे। कुछ देर बाद हमलोग सुबह की सभा के लिए विद्यालय के खेल-मैदान में गए। वहाँ एक सामूहिक प्रार्थना हुई। उसके बाद प्राचार्य ने नए विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए उन्हें अनुशासन के महत्त्व से अवगत कराया।
हमारी वर्ग-शिक्षिका पहली घंटी में वर्ग में आईं। उन्होंने पूरी कक्षा से मेरा परिचय कराया। उन्होंने मेरे पूर्व विद्यालय एवं परीक्षाफल के बारे में पूछा। इसी तरह चार घंटियाँ बीत गईं। मेरे कुछ सहपाठी मुझसे बात करने आए। हमलोग मध्यावकाश के दौरान बाहर गए । तब-तक मैंने कुछ मित्र बना लिए थे। मैंने उनलोगों के साथ अपना मध्याह्न भोजन साझा किया। उन्होंने मुझे विद्यालय का पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला और इन्डोर स्टेडियम दिखाया। उन्होंने मुझे विद्यालय के कुछ अन्य शिक्षकों के बारे में भी बताया। मैंने उनसे कुछ 'नोट्स' लिए। उन्होंने मेरे पाठ्यक्रम को पूरा करने में मुझे मदद करने का वादा किया। कुछ शरारती छात्रों ने मेरे साथ शरारत करने की कोशिश की। वह अनुभव भी अच्छा था। विद्‌यालय का प्रथम दिन होने के कारण मध्यावकाश के बाद पढ़ाई नहीं हुई । बच्चे खेलने लगे । मैंने खेल घर में जाकर कैरम बोर्ड और चैस खेला। खेल खेलते हुए मुझे बहुत आनंद आया । फिर छुट्‌टी की घंटी बजी । बच्चों ने बस्ता सँभाला और आपस में बातें करते हुए घर की ओर चले ।

उपसंहार -

इस प्रकार विद्‌यालय का प्रथम दिन नए विद्‌यालय को जानने तथा शिक्षकों एवं सहपाठियों से परिचय प्राप्त करने में बीता । कई नए अनुभव प्राप्त हुए । कई नए मित्र बनाए। नए मित्रों के साथ खेल खेले। फिर मित्र के साथ बातें करते-करते घर लौटे। घर लौटकर माँ, पिताजी और भाई के साथ अपने अनुभव बाँटे । मेरे सभी सहपाठी अच्छे थे। मैंने अपने नए विद्यालय में पहले दिन का बहुत आनंद लिया। कभी-कभी मुझे आज भी उस दिन की याद आती है।

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